सुशील कुशवाहा बनाम अभिषेक आनंद — चेरिया बरियारपुर में प्रतिष्ठा की लड़ाई तेज
राजद के सुशील कुशवाहा और जदयू के अभिषेक आनंद में सीधी टक्कर, जनता की नजरें टिकीं
ब्यूरो रिपोर्ट
बेगूसराय जिले की सात विधानसभा सीटों में इस बार सबसे चर्चित सीट बन गई है – चेरिया बरियारपुर विधानसभा। इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प है, क्योंकि मैदान में दो मंत्री परिवारों के वारिस आमने-सामने हैं। एक ओर हैं राजद प्रत्याशी सुशील कुमार, जो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद सिंह के पुत्र हैं, वहीं दूसरी ओर जदयू उम्मीदवार अभिषेक आनंद, जो पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा के पुत्र हैं। चुनाव का यह मुकाबला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह केवल दो उम्मीदवारों की जंग नहीं, बल्कि दो राजनीतिक विरासतों का संघर्ष है।
सतीश प्रसाद सिंह की विरासत का नया अध्याय
बिहार की राजनीति में सतीश प्रसाद सिंह का नाम सामाजिक न्याय के प्रतीक के रूप में लिया जाता है।
वे बिहार के पहले पिछड़े वर्ग से आने वाले मुख्यमंत्री बने थे। 28 जनवरी 1968 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, और भले ही उनकी सरकार केवल पाँच दिनों (1 फरवरी 1968 तक) चली, लेकिन उन्होंने बिहार की राजनीति का सामाजिक समीकरण हमेशा के लिए बदल दिया।
इसी राजनीतिक सोच और सामाजिक न्याय की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब उनके पुत्र सुशील कुशवाहा ने संभाली है। राजद ने उन्हें चेरिया बरियारपुर सीट से टिकट देकर मैदान में उतारा है। यह सीट पहले से राजद की जीती हुई सीट रही है, लेकिन इस बार पार्टी ने नए चेहरे के रूप में सुशील को मौका दिया है।
सुशील कुशवाहा का दावा – जनता का अपार समर्थन
चुनाव प्रचार के दौरान सुशील कुशवाहा ने कहा कि वे अपने पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने आए हैं।
उन्होंने कहा कि “यह इलाका बेरोजगारी, कॉलेज की कमी और अधूरे विकास कार्यों से जूझ रहा है। मैं युवाओं के लिए डिग्री कॉलेज, खेल मैदान और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर काम करूंगा।
विपक्ष द्वारा “बाहरी उम्मीदवार” का मुद्दा उठाए जाने पर उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि “मेरे विरोधी मेरे बाहरी होने की बात कर रहे हैं, लेकिन इसी वजह से जनता का मुझे और अधिक स्नेह मिल रहा है। यह मुद्दा अब जनता के बीच ग़ैर-जरूरी हो गया है।
वर्मा परिवार पर पुराने विवाद का असर
वहीं, जदयू प्रत्याशी अभिषेक आनंद के परिवार — पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और चंद्रशेखर वर्मा — हाल के वर्षों में कानूनी विवादों को लेकर चर्चा में रहे हैं। हालांकि मामले का फैसला टल गया है, लेकिन जनता के एक वर्ग में इसको लेकर असंतोष की भावना भी देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नाराज़गी का सीधा लाभ राजद उम्मीदवार सुशील कुशवाहा को मिल सकता है।
राजद के प्रति परंपरागत झुकाव
चेरिया बरियारपुर का इलाका लंबे समय से राजद का गढ़ माना जाता है। यहां के मतदाताओं में लालू प्रसाद यादव के प्रति अब भी भावनात्मक जुड़ाव है।
सुशील कुशवाहा खुद कहते हैं “यहां राजद केवल एक पार्टी नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है। यहाँ की जनता लालटेन और लालू यादव के नाम को याद करती है।
नीतीश बनाम तेजस्वी पर सुशील का बयान
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर प्रतिक्रिया देते हुए सुशील कुशवाहा ने कहा कि “नीतीश कुमार ने बिहार के लिए बहुत काम किया है, जनता ने उन्हें बहुत समय दिया, अब समय है नई सोच और नई ऊर्जा के साथ तेजस्वी यादव जैसे नेतृत्व को मौका देने का।” उनके अनुसार, तेजस्वी यादव के रूप में बिहार को “नई नीति, नई नीयत और नया नेतृत्व” मिला है।
अंतिम मुकाबला – जनता के फैसले का इंतजार
फिलहाल चेरिया बरियारपुर की हवा में दो ही नाम गूंज रहे हैं — सुशील कुशवाहा और अभिषेक आनंद।
एक ओर सामाजिक न्याय की विरासत और राजनीतिक सादगी की छवि है, तो दूसरी ओर सत्ता का अनुभव और प्रशासनिक पहचान। चुनाव प्रचार के आख़िरी दौर में दोनों ही प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि जनता किस पर भरोसा जताती है —विरासत पर या वादों पर 14 तारीख को आने वाला नतीजा ही तय करेगा कि चेरिया बरियारपुर की राजनीति किस दिशा में जाएगी।
Author: First Khabar Bihar
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