बेगूसराय की 230 करोड़ की सीवरेज योजना पर हाईकोर्ट में पीआईएल, उद्घाटन पर उठे गंभीर सवाल

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ब्यूरो रिपोर्ट

बिहार|बेगूसराय: नगर निगम क्षेत्र में वर्षों से अधूरी पड़ी 230 करोड़ रुपये की बहुचर्चित सीवरेज योजना का मामला अब पटना उच्च न्यायालय पहुंच गया है। योजना के कथित रूप से फेल होने और इसके बावजूद प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन किए जाने को लेकर जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

यह पीआईएल बेगूसराय के वरिष्ठ भाजपा नेता सह पटना उच्च न्यायालय के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल द्वारा दायर की गई है। याचिका में बिहार सरकार के प्रधान सचिव, नगर विकास विभाग के सचिव व संयुक्त सचिव, बेगूसराय के जिलाधिकारी, नगर आयुक्त, बिहार अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (बुडको) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, तोशिबा वाटर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड तथा केवड़िया कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को पक्षकार बनाया गया है।

उद्घाटन पर सवाल क्यों?
करीब 24 पृष्ठों की याचिका में समाचार पत्रों की रिपोर्ट, बुडको के पत्राचार, नगर विकास विभाग द्वारा प्रधानमंत्री के उद्घाटन से पूर्व जारी पत्र, तथा अमरेंद्र कुमार अमर द्वारा जिलाधिकारी को लिखे गए पत्र समेत कई दस्तावेज संलग्न किए गए हैं।

पीआईएल में मुख्य सवाल यह उठाया गया है कि जब 14 अप्रैल 2025 को विधानसभा में बुडको ने स्वीकार किया था कि संबंधित कंपनियों को कार्य में लापरवाही के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया है, तो फिर 11 मई 2025 को नगर विकास विभाग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन कार्यक्रम की स्वीकृति किस आधार पर दी?

याचिका में उल्लेख है कि विभागीय पत्र में स्पष्ट शर्त थी कि योजना पूरी तरह संचालित और सुव्यवस्थित होने की स्थिति में ही उद्घाटन किया जाएगा। इसके बावजूद 20 जून को प्रधानमंत्री द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एसटीपी और सीवरेज नेटवर्क का उद्घाटन कर दिया गया। समारोह में जिलाधिकारी, नगर विधायक, बुडको अधिकारी, मेयर, उपमेयर और संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

सात साल बाद भी अधूरी योजना
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में 90 किलोमीटर लंबे सीवरेज नेटवर्क का शिलान्यास हुआ था और फरवरी 2020 से कार्य शुरू किया गया। प्रारंभिक योजना के अनुसार इसे 2022 तक पूरा होना था। लेकिन सात वर्ष बीत जाने के बाद भी योजना पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी है।
इस योजना के तहत 95 किलोमीटर से अधिक लंबी सीवर लाइन, इंटरमीडिएट पंप स्टेशन और 17 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया गया। इसका उद्देश्य शहरी गंदे पानी को सीधे गंगा नदी में जाने से रोकना और शोधन के बाद उसका उपयोग सुनिश्चित करना था। यह परियोजना नगर विकास एवं आवास विभाग तथा जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत शुरू की गई थी।

जमीन पर हालात बदतर
नगर निगम क्षेत्र में गंदे जल निकासी की समस्या आज भी गंभीर बनी हुई है। अधिकांश मोहल्लों में नालियों की स्थिति खराब है और सीवरेज व्यवस्था के अभाव में बाथरूम व रसोई का पानी सड़कों पर बह रहा है। इससे जलजमाव, बदबू और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
वर्ष 2019 के बाद जिन लोगों ने मकान बनाए, उन्होंने बड़े सेप्टिक टैंक नहीं बनवाए, यह सोचकर कि जल्द ही सीवरेज लाइन चालू हो जाएगी। अब न तो उन्हें सीवरेज सुविधा मिल रही है और न ही वैकल्पिक व्यवस्था, जिससे आर्थिक और मानसिक परेशानी बढ़ गई है।
अब निगाहें हाईकोर्ट पर
पीआईएल दाखिल होने के बाद यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है। सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि उद्घाटन प्रक्रिया और योजना क्रियान्वयन में किस स्तर पर चूक हुई। फिलहाल इस मुद्दे ने बेगूसराय की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

First Khabar Bihar
Author: First Khabar Bihar

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