महादलित टोले की बदहाल स्थिति पर सवाल ! आखिर जिम्मेदार कौन?

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बेगूसराय विधानसभा के महादलित टोले की उपेक्षा पर उठा सवाल

रिपोर्ट- संजय कुमार

बिहार: चुनावी वादों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर एक बार फिर सामने आया है। विधानसभा क्षेत्र के महादलित बस्तियों की बदहाल स्थिति पर जनता ने वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों से कड़ा सवाल किया है। आरोप है कि नेता शादी-ब्याह और भोज में तो पहुंच जाते हैं लेकिन महादलित बस्ती में किसी दुख-दर्द या मौत की खबर के बाद भी कदम नहीं रखते।

यह एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ है कि यहां के महादलित बस्तियों की स्थिति आज भी बद से बदतर क्यों है। चुनाव के समय नेताओं द्वारा किए गए वादे और ज़मीनी हकीकत के बीच का फर्क जनता को बेचैन कर रहा है।

खासतौर पर बंदद्वार मुसहरी टोला में हाल की घटना के बाद भी विधायक और सांसद का न पहुंचना लोगों के गुस्से की वजह बना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यही असली चेहरा है नेताओं का, जो वोट के वक्त लुभावने वादे करते हैं और बाद में रिपोर्ट कार्ड व सर्टिफिकेट बांटकर जनता को बहकाते हैं।

योजनाओं की हकीकत

सरकार की कई योजनाएं अब भी कागजों तक सीमित हैं। हर दलित परिवार को 5 डिसमिल जमीन देने का वादा अब तक अधूरा है। सात निश्चय योजना के तहत नली-गली और पेयजल सुविधा कई बस्तियों तक नहीं पहुंची। प्रधानमंत्री शौचालय योजना का लाभ भी भ्रष्टाचार में गुम हो गया। आयुष्मान भारत योजना का कार्ड होने के बावजूद इलाज में गरीबों को मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं।

उपेक्षित बस्तियां

सिर्फ बंदद्वार ही नहीं बल्कि कुसमाहौत, ओझर परना, वीरपुर, डीह, करीम टोल, सिकराहुल, साहुरी, बथौली, लदौरा, सिंगदाह, मैदावाभिंगमा, भीठ, नौला, पर्रा, दमदमा, सांख समेत कई महादलित टोले अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।

भीम आर्मी बेगूसराय जिला अध्यक्ष ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति

भीम आर्मी बेगूसराय के जिला अध्यक्ष विकास कुमार आजाद ने आज एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कई गंभीर मुद्दों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र की महादलित बस्तियों की स्थिति आज भी चिंताजनक बनी हुई है।

विकास कुमार आजाद ने बताया कि चुनाव के समय नेताओं द्वारा किए गए वादे और जमीन पर वास्तविक स्थिति में काफी अंतर है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान और पूर्व विधायक, सांसद तथा अन्य जनप्रतिनिधि शादी-ब्याह और भोज जैसे आयोजनों में तो पहुंच जाते हैं, लेकिन महादलित बस्तियों में दुख या मौत की खबर आने पर नहीं दिखाई देते।

जनता का सवाल

जनता का सीधा सवाल है कि जब विधायक, सांसद और पंचायत प्रतिनिधियों के पास अपनी-अपनी योजनाओं के लिए बजट होता है तो फिर इन महादलित बस्तियों की स्थिति क्यों नहीं सुधरती? चुनाव में किए गए वादे आखिर कहां गायब हो जाते हैं?

First Khabar Bihar
Author: First Khabar Bihar

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