निजी विद्यालयों की मनमानी पर प्रशासन का कड़ा शिकंजा, अवैध शुल्क वसूली पर सख्त कार्रवाई का आदेश
संजय कुमार की रिपोर्ट
बेगूसराय, जिले में संचालित निजी प्रारंभिक एवं माध्यमिक विद्यालयों द्वारा नामांकन प्रक्रिया के दौरान अभिभावकों से मनमानी शुल्क वसूली एवं अन्य अनियमितताओं की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी, मनोज कुमार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली, कैपिटेशन फीस अथवा अभिभावकों के आर्थिक शोषण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि कई निजी विद्यालयों द्वारा पुनः नामांकन शुल्क (री-एडमिशन फीस), वार्षिक शुल्क एवं अन्य अनावश्यक मदों में राशि वसूल की जा रही है। इतना ही नहीं, अभिभावकों को एक निश्चित दुकान से ही पाठ्य-पुस्तकें, कॉपियां एवं यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो कि नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। प्रशासन ने ऐसे सभी कृत्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश दिया है।
आदेश के तहत सभी निजी विद्यालयों को 15 अप्रैल 2026 तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट, विद्यालय परिसर के सूचना पट्ट एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कक्षा-वार पुस्तकों की सूची, यूनिफॉर्म का विवरण, उसकी गुणवत्ता (स्पेसिफिकेशन्स) तथा संपूर्ण शुल्क संरचना को अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी दुकान से किताबें एवं अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे।
बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2019 के प्रावधानों का हवाला देते हुए यह भी निर्देशित किया गया है कि कोई भी विद्यालय वार्षिक शुल्क में 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं करेगा। इसके अतिरिक्त, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत नामांकन या प्रोन्नति के नाम पर किसी भी प्रकार की कैपिटेशन फीस लेना पूर्णतः प्रतिबंधित एवं दंडनीय अपराध घोषित किया गया है।

विद्यालयों को यह भी निर्देश दिया गया है कि यूनिफॉर्म में बार-बार परिवर्तन कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न डाला जाए। कम से कम तीन वर्षों तक यूनिफॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। वहीं, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के तहत कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटों का आरक्षण सुनिश्चित करना सभी निजी विद्यालयों के लिए अनिवार्य किया गया है।
आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि उल्लंघन की स्थिति में संबंधित विद्यालय के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रथम उल्लंघन पर एक लाख रुपये तक का अर्थदंड, पुनरावृत्ति होने पर दो लाख रुपये तक का जुर्माना तथा लगातार अवहेलना की स्थिति में विद्यालय की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को अपने-अपने क्षेत्रों में सघन निगरानी रखने तथा प्रतिदिन की रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा भी सतत अनुश्रवण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
स्पष्ट है कि जिला प्रशासन का यह निर्णय न केवल अभिभावकों को राहत प्रदान करेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।


Author: First Khabar Bihar
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